जिला - महासमुंद
राज्य - (छ. ग.)
विषय - लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पतेल
विधा - कविता
इकतीस अक्टूबर 1875 को,
जन्म हुआ नडियाद, गुजरात ।
शारदेय पूर्णिमा पावन तिथि,
नाम वल्लभ सरदार धरात।।
भारत माता के वीर सपूत ,
खड़े फौलादी सीना ताने ।
आजादी के महान अग्रदूत ,
बहादुर कभी हार ना माने ।।
सत्य-अहिंसा और दृढ़ता थी,
न्याय के सच्चे पथ प्रदर्शक।
सरल , शांत स्वभाव के संवाहक,
थे शांति के महान संरक्षक।।
वीरता के परिचायक सपूत,
विश्व एकता के रहे पुजारी।
सागर सम गम्भीर थे वल्लभ,
करते सिंह सम दहाड़ भारी।।
धर्यवान ,साह ,परोपकारी,
भव्य भारत के बने सरताज।
ये राष्ट्र प्रहरी, रक्षक बनकर ,
करते थे वसुंधरा का काज।।
अशीम व्यक्तित्व के वीर धनी,
आत्मनिर्भरता के कर्णधार।
शोषण रूपी जड़ को काटकर,
दे स्वतंत्रता के वृक्ष फलदार ।।
हारे नही , नही झूके कभी ,
ये तूफानों का रुख मोड़ते ।
कड़ा मुकाबला करे ये वीर,
सौ-सौ दुश्मन का बल तोड़ते।।
जाति , धर्म का भेद ना जाने ,
सारे विश्व को माने अपना ।
समानता का दीया सजाकर,
विश्वबंधुत्व रखे मन सपना।।
ये झूकने नही दिया तिरंगा,
दिग्गज,कर्मनिष्ठ ,प्रलय कारी,
देश भक्त थे प्रखर, लौहपुरुष ,
मातृभूमि के पूत अवतारी ।।
माँ भारती के राजदुलारे,
प्रणम्य हुए हैं आज संसार ।
निश्छल ,निर्मल, निर्भय थे वीर,
महान हुए युग पुरुष सरदार।।
पुष्पा गजपाल पीहू
महासमुंद(छ. ग.)
No comments:
Post a Comment