खैरागढ़, जिला-राजनांदगांव
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-"प्रकाश पर्व दीपावली"
विधा-कविता
एकता और प्रेम का,
खुशियों भरा त्यौहार।
छाई, जीवन में नई उमंग,
मिले प्रेम और दुलार।।
ऊंचनीच के भेद मिटाकर,
प्रेम -भाव की ज्योति जलाएं।
नई दिशा और नये रास्ते,
मिलकर उन्हें दिखलाएं।।
प्रेम का बंधन ,अटूट बने,
मिले हर्ष अपार।
डोर बैर की टूटे जब ,
मन सरिता मिले सिंधु पार।।
जगमग जगमग दीप जले,
श्रद्धा कमल मन में खिले।
द्वार- द्वार हो खुशियाँ,
आपस में मिले गले।।
परस्पर भेदभाव के अँधेरे ,
हम सब मिटाते चले।
प्रेम के प्रकाश पर्व को ,
हम सब फैलाते चले।।
मानव की जीत का,
दानव की हार का।
सिखाएँ कभी न क्लेश!
देतें प्रेम और सहयोग का संदेश।।
रात के समंदर में,
जगमग ज्योत अपार।
जन-जन की इस प्रीति का,
पावन दीपावली त्यौहार।।
दीपावली पर्व हमे प्रेम ,सहयोग और भाईचारे का संदेश देती है।
रचनाकार-महदीप जंघेल(खैरागढ़)
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