स्थान---नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला- जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय---आदमी
शीर्षक-आदमी की पहचान
आदमी को देखकर, पहचानना कठिन ।
उसके गुण अवगुण को, जानना कठिन ।
एक आदमी परहित में,सर्वस्व लुटाता ।
एक आदमी देख आदमी , खुद को छुपाता ।
रहता जीवन, किसी का रात किसी का दिन ।
एक आदमी धन को, खूब कमाये जा रहा ।
एक आदमी मतलब नहीं,लुटाये जा रहा ।
कोई आकाश खरीदे, कोई खरीदे जमीन ।
कोई आदमी धर्म का, गुणगान कर रहा ।
और इसके आड़ में, दुनियां को ठग रहा ।
कोई ईश्वर को एक कहता, कोई बताये गिन ।
कोई आदमी बुरा है, कोई आदमी भला ।
किसी के पास ज्ञान , किसी के पास कला ।
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