Saturday, November 7, 2020

जांजगीर से प्रताप चंद साहू की रचना- माता-पिता

रचनाकार-प्रताप चंद साहू
जिला-जांजगीर (तुलसी) छत्तीसगढ़
 विधा-चौपाई 
शीर्षक -माता-पिता


बड़ि विडंबना हुए संताना। बात-बात लगे आंख दिखाना।
रहत पढ़त अरू रौब जमांहीं। विद्या-बुद्धि कुछ नहीं पाहीं।।6।।

टूटी कमर ढोवहि नर्क बोझा।पाई विद्या जो कोई ओझा।
काम धाम नाहिं मन रूचा। तन श्रृंगार बनावहि रूपा।।7।।

गली गली सो दौड़ लगाई। कन्या देख ता कियो हंसाई।
बढै केस-वधु इत्र छिडकावा। ना जानव काहू धन पावा।।8।।

मात-पिता है आश लगायो। कियो करम सो फल अब पायो।
लगै नौकरी दुर को जावा।सुत-बनिता ते प्रेम बढ़ावा।।9।।

रहो घर तो कियो लरकाना। बंद-जुबान-मार धमकाना।
मात-पिता लो हुए नरकों सा।पावक-पत्नी बने सरकों सा।।10।।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...