जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - मुक्त कविता
शीर्षक - " तीजन बाई - पंडवानी गायिका "
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छत्तीसगढ़ के लोककला के,
मैं कतका करौं बखान।
आनी-बानी के कला हमर राज म,
दुनिया भर में बनावत हे पहचान।।
पंथी भरथरी करमा ददरिया,
लोरिक चंदा अऊ पंडवानी।
सुआ-नाचा भोजली गीत,
नाचा-गम्मत,ढोलामारु कथा कहानी।।
पंडवानी के महान कलाकार।
हमर आदरणीया तीजन बाई हे।
देश-विदेश म कथा सुनाके,
कराथे छत्तीसगढ़ के बडा़ई हे।।
जनम होइस भिलाई के,
गाँव गनियारी म।
माता-पिता के नाम ऊँचा करिस,
अपन सुग्घर कलाकारी म।।
रंग-रंग के फूँदन से सजे,
तीजन बाई के तमूरा।
आनी-बानी किरदार निभाथे,
बांचे कसर करथे सब पूरा।।
कभू दुःशासन के बाँह बन जाथे,
कभू अर्जुन के रथ।
कभू भीम के गदा बन जाथे,
बताथे ज्ञान अऊ सत।।
पद्मश्री पद्म विभूषण,
उपाधि से आप मन सुशोभित।
डी लिट मानद विश्वविद्यालय बिलासपुर ह दिस,
नृत्य शिरोमणि से भी अलंकृत।।
महाभारत के कथा ल,
ऐसे ऐहा सुनाथे जी।
सुनोइया मन के मन ह घलो,
कथा में रम जाथे जी।।
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मौलिक रचना ( स्वरचित )
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
Bahut sundar
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