जिला - महासमुन्द
राज्य - छत्तीसगढ़
विधा - कविता
विषय - "मेरा भारत महान क्यों"
उत्तर , दक्षिण , पूर्व, पश्चिम,
भारत भूमि आबाद।
नद ,नाले , सागर लहरा कर ,
बजाते मधुरिम नाद ।
जहाँ सूर्य की पहिली लाली ,
भरते मधुर मुस्कान ।
पावन ,पुनीत धरती महके ,
मेरा भारत महान ।।
पर्वत , घाटी अम्बर चूमे ,
दमके वनों की पात ।
मौसम रँगीन लगे सुहावन ,
है बसंत गुनगुनात ।
भोर भये जहाँ पँछी छेड़े ,
मधुमय सुरीली तान ।
फसलों से भू लहराती है ,
मेरा भारत महान ।।
त्योहारों में झूमे जन - जन ,
भानव भाई चारा ।
गाँव, गली ,घर द्वार सजे ,
लगते पावन न्यारा।
रामायण,गीता या कुरान,
सब का एक ही शान ।
संस्कृति विश्व वंदनीय है ,
मेरा भारत महान ।।
एकता,अखंडता ,बंधुत्व ,
विश्व प्रेम भरे भाव।
सौहार्द्रता , परोपकार का,
सदा लहराता छाँव ।
मात पर अर्पण होने पूत ,
छोड़े सारा जहान ।
हिन्दू ,मुस्लिम भेद नही है,
मेरा भारत महान ।।
पुष्पा गजपाल "पीहू"
महासमुंद (छ. ग.)
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