Wednesday, November 11, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- महाद्वीप

नाम-गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापाराखुर्द/ सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता मुक्त
विषय----महाद्वीप
शीर्षक----महाद्वीप के देश भारत

देश सारे महाद्वीप के, सबके अपने शान है ।
भारत अपना उनमें से,यह भी खूब महान है ।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, हैं यहां के वासी ।
कहते अपने आपको,हम सब भारत वासी ।
भारत इसका एक नाम, दूसरा हिन्दुस्तान है ।

पंचशील का यह पुजारी, अहिंसा का अग्रदूत  ।
शिक्षा ,संस्कृति,विकास की, दृष्टि से मजबूत।
जन्में यहां महावीर, बुद्ध,सुर ,कबीर जैसे इंसान ।

गंगा,यमुना, महानदी, यहां की पावन नदियां ।
जिनकी पावनता की कहानी,चलती रहेगी सदियां ।
राम की अयोध्या कृष्ण की गोकुल, हैं यहांजिसे पूजता जहान  ।

उत्तर में महा हिमालय,जो  देश का है पहरेदार ।
दक्षिण में खिलखिलाता सागर, पड़ा है अपरंपार ।
सच्चे लोकतंत्र यहां हैं, शासन का संविधान ।

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