Saturday, November 14, 2020

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- दीपावली

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
शीर्षक-- दीपावली
विधा--सार छन्द 
दि.--१४.११.२०
                       ०××××××०
ऐसा   दीपोत्सव   है  प्यारे , आओ सभी मनायें ।
प्रेम-स्नेह का  दीपक  लेके , मन के द्वार जलायें ।।

देश-प्रेम के  मृदु  मिट्टी का , होगा  दिया बनाना ,
श्रद्धा-समता-सहिष्णुता के , उसमें  तेल लगाना ।
सद्विचार-करुणा  की बाती , प्यारे  सभी लगायें ।।
प्रेम-स्नेह का  दीपक  लेके , मन के द्वार जलायें ।।१।।

माचिस  ममता-मर्यादा की , लें  अपने  हाथों  में ,
रखें सावधानी  दिये  जला , दीपपर्व    रातों   में ।
हिंसा-द्वेष -घृणा- निर्दयता , छल-दुष्कर्म मिटायें ।।
प्रेम-स्नेह का  दीपक  लेके , मन के द्वार जलायें ।।२।।

आतंकवाद-नक्सल तम हैं , होगा   इसे  मिटाना ,
एकता तथा अखण्डता का , होगा  दीप जलाना ।
सेवा-सहभागी  भाव  जगा , मन में दीप जलायें ।।
प्रेम-स्नेह का  दीपक  लेके , मन के द्वार जलायें ।।३।।

महँगाई  की  अंधकार  को , हमें  मिटाना  होगा ,
नये - नये  रोजगार  का  है , दिया जलाना होगा ।
भूखमरी  की अंधकार  को , तुरन्त  इसे  मिटायें ।।
स्नेह-प्रेम का  दीपक  लेके , मन के द्वार जलायें ।।४।।

राष्ट्रीयता-दीप  घर - घर में , होंगे    हमें  जलाने ,
सीमापर है  पहुँचके हमको , होंगे  शीश  कटाने ।
नित आलोकित हों सीमाएँ , ऐसी  रश्मि जलायें ।।
प्रेम-स्नेह का  दीपक  लेके , मन के द्वार जलायें ।।५।।

बलिदानी   शूरवीर   अपने , करें  देश  रखवाली ,
इनके  कारण  हम मना रहे , नित होली-दीवाली ।
अगुवाई  में  'ठाकुर'  इनके , दीपक सदा सजायें ।।
प्रेम-स्नेह का  दीपक  लेके , मन के द्वार जलायें ।।६।।
                         ०×××××०
व्याख्या--नवीन विधान से दीपावली मनाने का
              आह्वान किया गया है ।

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