स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
शीर्षक-- दीपावली
विधा--सार छन्द
दि.--१४.११.२०
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ऐसा दीपोत्सव है प्यारे , आओ सभी मनायें ।
प्रेम-स्नेह का दीपक लेके , मन के द्वार जलायें ।।
देश-प्रेम के मृदु मिट्टी का , होगा दिया बनाना ,
श्रद्धा-समता-सहिष्णुता के , उसमें तेल लगाना ।
सद्विचार-करुणा की बाती , प्यारे सभी लगायें ।।
प्रेम-स्नेह का दीपक लेके , मन के द्वार जलायें ।।१।।
माचिस ममता-मर्यादा की , लें अपने हाथों में ,
रखें सावधानी दिये जला , दीपपर्व रातों में ।
हिंसा-द्वेष -घृणा- निर्दयता , छल-दुष्कर्म मिटायें ।।
प्रेम-स्नेह का दीपक लेके , मन के द्वार जलायें ।।२।।
आतंकवाद-नक्सल तम हैं , होगा इसे मिटाना ,
एकता तथा अखण्डता का , होगा दीप जलाना ।
सेवा-सहभागी भाव जगा , मन में दीप जलायें ।।
प्रेम-स्नेह का दीपक लेके , मन के द्वार जलायें ।।३।।
महँगाई की अंधकार को , हमें मिटाना होगा ,
नये - नये रोजगार का है , दिया जलाना होगा ।
भूखमरी की अंधकार को , तुरन्त इसे मिटायें ।।
स्नेह-प्रेम का दीपक लेके , मन के द्वार जलायें ।।४।।
राष्ट्रीयता-दीप घर - घर में , होंगे हमें जलाने ,
सीमापर है पहुँचके हमको , होंगे शीश कटाने ।
नित आलोकित हों सीमाएँ , ऐसी रश्मि जलायें ।।
प्रेम-स्नेह का दीपक लेके , मन के द्वार जलायें ।।५।।
बलिदानी शूरवीर अपने , करें देश रखवाली ,
इनके कारण हम मना रहे , नित होली-दीवाली ।
अगुवाई में 'ठाकुर' इनके , दीपक सदा सजायें ।।
प्रेम-स्नेह का दीपक लेके , मन के द्वार जलायें ।।६।।
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व्याख्या--नवीन विधान से दीपावली मनाने का
आह्वान किया गया है ।
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