निवास:-बैरन-बाज़ार,रायपुर ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विधा--,छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-""धनतेरस "" ।
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*****++धनतेरस ++******
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जीवन की बगिया में---
धन-वैभव हो पास,
तब दिखाई देता,धनतेरस खास ।
एक तरफ करोना महामारी की त्रास--
जीवनशैली में,पड़ी सभी तरह की मार
अर्थ बिना जीवन अनर्थकारी हुआ,
आया धनतेरस और दीपावली--
गरीब आदमी के,चेहरे से हँसी हुई गायब ।
हर पल,जीवन बन गयी इक पहेली--
दो जुन की रोटी भी नसीब बमुश्किल,
फिर धनतेरस और दीपावली पर्व की,
खुशियां मेरे आँगन में,आएगी कैसे--?
धनतेरस,धनकुबेर,धनवंतरि के--
यशोगान व फलीभूत का फल,
पाने,पूजन करने व कृपा लेने,
शुभ दिवस का करें,हार्दिक स्वागत ।
यह पर्व,सबके जीवन में--
शुभ मंगल लेकर आये,
करे सबका कल्याण व पूरी करे,
सबकी मनोकामना--।
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