Friday, November 20, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- कागज़ की कश्ती

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-कागज की कश्ती
विधा-कविता (मुक्त छंद)

 यादें   बचपन की 
कश्ती कागज की 
बरसात के पानी में 
भींगते हुए अक्सर
नाव के पीछे -पीछे 
दूर तक चले जाना ।

 न किसी का डर न ही
 कोई चिंता अद्भुत खुशी
 मछलियों का आभा ष
   बारिश में भींगना और
बहाने बनाना  फिर
रुठना और  मान जाना।

अब तो लगता है कि
जीवन ही कागज की
कश्ती है  जाने कब
परेशानियों का शैलाब
बहा ले जाए इस
जीवन रुपी कश्ती को।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग

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