Saturday, November 14, 2020

रायगढ़ से डिग्री लाल जगत निर्भीक की रचना- दीपावली

नाम -डिग्री लाल जगत निर्भीक
जिला- रायगढ़
शीर्षक-दीप उत्सव
विधा -स्वतंत्र


दीप उत्सव,
पहन सितारों की चुनरिया, 
दीप मल्लिका संवर कर आई है।प्रकाश  पुंज की झिलमिल, पंक्तियां एक नव संन्देशा लाई है।

तम का घेरा दिल से हटा लो ,
यह मंगल घड़ी अब आई है।
प्रकाशित हो सब का जीवन दीपावली की शगुन बधाई है।

नगर गांव चहुं ओर अंधियारा,
कविवर उठो करो प्रकाश।
सूरज चांद सितारों पर से ,
उठ गया है सबका विश्वास।

शब्द -शब्द बन जाये दीपक,
अक्षर से मुझे बाती की प्यास।
यह शुभकामना अर्पित कविवर,
ज्योतिर्मय हो सब की आस।

अमावस की वह काली रात ,
जब सूरज ढल जाता है।
चाँदनी विद्रोह में रोती है ,
चाँद कहीं खो जाता है ।

तो उपेक्षित अपमानित  अपनी,
हस्ती को खोता रहता है।
बड़े घरों में कोई नहीं है उससे,
पूछने वाला वह हर रात विवश हो
रोता है

पर वही दीपक मान सम्मान, आदर के साथ किसी गरीब की, कुटिया में जलता है।
हजारों हवाओं के झोंकों के बीच, किसी आंचल के सहारे में पलता है।

डिग्री लाल जगत निर्भीक
वार्ड क्रमांक 9 सवरा पारा पुरानी बस्ती खरसिया जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़

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