Monday, November 9, 2020

जांजगीर-चांपा से संतोष प्रधान "कचंदा" की रचना- आत्म ज्ञान

नाम-    संतोष प्रधान "कचंदा"
स्थान-  कचंदा
जिला-  जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-  कविता
शीर्षक- आत्म ज्ञान

                    आत्म ज्ञान

चिंता से चालाकी  घटे, कष्ट घटाये शरीर ।
बात   मेरी  मान   जा,  मत  हो तू अधीर ।
मत हो तू अधीर , तू   अपने  को पहचान ।
सर्व शक्ति अंतर बसा, कर ले आत्म ज्ञान ।
कह "प्रधान" कविराय, तभी होगा उद्धार ।
जीवन अपना बना ले, कर  ले नव सुधार ।

जिसे  लोग  समझते  थे , चरणों की धूल ।
वही  निकला    बाद  में   नयनों की फूल ।
नयनों की   फूल, विसराया खुशबू देश में ।
वह   साक्षात् देव  बना  मानव  के वेश में ।
कह "प्रधान" कविराय, पहले मूर्ख नादान।
पढ़ा-लिखा सुकर्म से , बना  बहुत महान ।

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