सुंदरगढ़ ,ओडिशा
विधा-कविता
विषय-धनतेरस
आज चहुँ ओर छाया है ,उत्सव का माहौल
सजी हैं बाजारें ,लोग कर रहे तोल-मोल
चाहत ये सभी की तेरह गुना धन का वरदान मिले
माँ लक्ष्मी की स्वागत में ना रहे आज कोई कमी
समुद्र मंथन में शंख,चक्र लिए उत्पन्न
आयुर्वेद के आचार्य धन्वंतरि जी की जयंती पे
लोग कामना कर रहे रोगमुक्त राष्ट्र की
इस दीवाली पर ना बिछड़े कोई अपनो से
ना सुना हो आंगन किसी का दीपों से
धनतेरस पे कोई सोच रहा कितना सोना लूं?
औऱ कोई सोच रहा आज रात कहाँ सोऊ
काश मेहरबान होते कुबेर जी सबपर समान
तो किसी गरीब का शोषण ना होता
कोई पैसों के फटाखे जला रहा
तो कोई भूख से बिलखता ना रोता।
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