Thursday, November 12, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- धनतेरस

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - मुक्त कविता 
   शीर्षक - " धनतेरस "
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रंग-बिरंगी लाइटों से सज गया बाजार। 
आया देखो धनतेरस का त्यौहार। 
घर में लाओ खुशियाँ लाकर नया-नया उपहार।
सोने-चाँदी हीरे खरीदो पाओ माँ लक्ष्मी का दुलार।। 

रत्न-आभूषण आज खरीदना,
होता बहुत फलदाई है। 
प्रेम-भाव से सब पूजा करते,
धन से परिपूर्ण होता सुखदाई है।।

दीपों की माला मैंने, 
द्वार पे अपने सजाई है।
सुन्दर-सुन्दर रंगोली बनाकर, 
माँ लक्ष्मी को बुलाई है।। 

महंगे चीजे भले खरीदो,
करने अपने सपने साकार। 
दीप खरीदना मिट्टी का ही, 
फूटपाथ पर देखो बैठा,
मायूस ओ कुम्हार।। 

मिट्टी का यह कलाकार है। 
बेबस और लाचार है। 
चीनी चीजें से घटती इनकी मांगें, 
करना चीनी का अब बहिष्कार है।। 

खुशियों का ये त्यौहार है। 
मिलता अपनों से प्यार है। 
मिल-जुलकर सब पर्व मनाओ,
साथ पूरा घर-परिवार है।। 

धन की देवी माँ लक्ष्मी मेरी, 
करुँ मैं तेरा गुणगान। 
खुशियाँ लाओ गरीबों के जीवन में भी, 
देकर कुछ उपहार और सामान।।

धनतेरस का यह पावन पर्व, 
पूरा करे सभी के सब अरमान। 
माँ लक्ष्मी कदम रखे सबके घर में, 
बने सभी धनवान।। 

किसी का घर न हो सुनसान।
लायें सबके चेहरे पे मुस्कान।। 
       
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मौलिक रचना (स्वरचित) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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