स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"महक"
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बारिश की पहली फुहार
गिरी जब धरती पर
सौंधी सी महक ने
प्रफुल्लित किया संसार
हवा भी महकने लगी
महकने लगी कलियां
मेघ के बरसने से
सब कुछ हुआ नया
प्रस्फुटित होकर अंकुर
बाहर आने को आतुर
इस अनोखे जहां को
देखने को है व्याकुल
इंद्र - धनुषी रंगों से
फिजा भी रंगीन हुआ
सजने लगी है धरा
नवश्रृंगारित चमन हुआ
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