राज्य- मध्य प्रदेश
रचना का शीर्षक- मेरा गांव
विधा-छंद मुक्त
पेड़ नीम के बहुत वहां,
पर शहद सा मीठापन भी है ।
कुछ ऐसा है गांव मेरा,
जहां गैरों से अपनापन भी है।
है एक बड़ा सा कुआं वहां,
जहां से जल सब भरते हैं।
आई विपत्ति अगर किसी पर,
साथ मदद सब करते हैं ।
हैं बहुत से खेत वहां,
बैलों से जोता जाता है।
सरसो,धान,गेहूं के संग,
प्रेम का बीज भी बोया जाता है ।
कोयल की मधुर मिठास वहां,
तो कौए का कांव-कांव भी है ।
बच्चों ने डाला झूला जहां,
वो बरगद की छांव भी है
रोज शाम को दादी नानी,
बैठ लोरिया सुनाती है
नन्हें बच्चों की आँखों पर,
कुछ ऐसे नींद बुलाती हैं ।
है सौभाग्य मेरा मैं जन्म लिया,
इस गाँव की पावन मिट्टी में
जहां देवियां पूजी जाती,
प्रतिबिंब बना हर बिट्टी में
(बिट्टी=बेटी :देशज)
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