स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-निबंध
विषय- स्कूली पाठ्यक्रम में पत्र लेखन का समावेश
शीर्षक- कोई महत्व नहीं रखता
हर शिक्षक, व्याख्याता,अध्यापक पत्र लेखन के संबंध में जब एक विद्यार्थी को इसकी अवधारणा का ज्ञान कराता है स्पष्ट कर देते हैं"पत्र लेखन पढ़ाई का महत्व पूर्ण अंग है इसका समुचित ज्ञान प्रत्येक विद्यार्थी को होना आवश्यक है इस कला या शिक्षा में सबको पारंगत होना चाहिए ।"
सोलह लाइन का पत्र लेखन,सोलह वर्षों की पढ़ाई , शिक्षाविद,विचारक,शिक्षक, वैज्ञानिक सभी का समूह इसकी चिंतन में लगा हुआ है नित्य प्रयोग हो रहे हैं शिक्षा और शिक्षा के पाठ्यक्रमों में हमारी अध्ययन सामग्री का जबसे समावेश किया गया है, उत्तरोत्तर विकास सीखने की सभी आयामों का संग्रहण परीक्षण तदानुसार सीखाने की सरल उपायों का चिन्हांकन अनवरत जारी है । स्कूली पाठ्यक्रमों में पत्र लेखन का समावेश शिक्षा की नींव से ही रख दिया गया है । फिर भी पत्र लेखन की जो ज्ञान है बहुत ही कठिन है कई वर्षों के पठन-पाठन लेखन अभ्यास के बावजूद भी एक विद्यार्थी पूर्ण आत्मविश्वास के साथ इस ज्ञान में अपने आपको पारंगत हूं कह सकने की क्षमता का विकास नहीं कर पाता है ।कई प्रकार के पत्र लेखन के बावजूद भी वह पूर्व ज्ञान का सहारा लेकर ही आगे बढ़ता है ।
वर्तमान में पत्र लेखन प्रतियोगिताओं तक में ही परिलक्षित होते हैं व्यवहार में कार्य परिणीती के रुप में लिखे ही नहीं जा रहे हैं । पाठ्यक्रम में किसी विषय को शामिल कर लेने से उसके विकास संभव है मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं मैं ने बच्चों को काफी वर्षों से इसका ज्ञान कराया है । और पाया है इसका जीवन में व्यवहार में अत्यधिक उपयोग हो वही ज्ञान हमारे लिए उपयोगी है अन्यथा नहीं ।
No comments:
Post a Comment