डॉ एन के सेठी
बाँदीकुई(दौसा)राज.
विषय - माँ शेरावाली(कुंडलिया)
शेरावाली माँ करे, इस जग का उद्धार।
झोली भरती है सदा, रखे सुखी परिवार।।
रखे सुखी परिवार, मात दुर्गुण सब हरती।
करे दया का दान, गुणों से सबको भरती।।
कहता कवि करजोरि,मात करती रखवाली।
कर सबका कल्याण, अम्ब हे शेरावाली।।
माँ शक्ति की उपासना , होते है नवरात।
मात की भक्ति में सदा , करते हैं जगरात।।
करते हैं जगरात , कृपा कर मात भवानी।
होती जय जयकार , सुनो हे माता रानी।।
कहता कवि करजोरि,करें सब माँ कीभक्ति।
करो सदा उपकार, दयामयी हे माँ शक्ति।।
माता है ममतामयी , करती भव से पार।
भक्तों पर करती कृपा, करे असुर संहार।।
करे असुर संहार , मात है शक्तिशालिनी।
होती सदा प्रसन्न, भक्त पर जगतपालिनी।।
कहता कवि करजोरि,माँ की कृपा वो पाता।
करता मन से याद, सुने सब उसकी माता।।
नवराते अब आ गए, कर लो माँ को याद।
करता जो भी भक्ति है, माँ सुनती फरियाद।।
माँ सुनती फरियाद, सदा ही शुभफल देती।
केवल देखे भाव,नही माँ कुछ भी लेती।।
रख श्रद्धा विश्वास, करें माँ के जगराते।
रखो शुद्धता भाव, करे माँ के नवराते।।
©डॉ एन के सेठी
बाँदीकुई(दौसा)राज
Saturday, October 17, 2020
डॉ एन के सेठी की रचना- माँ शेरावाली
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