Wednesday, October 14, 2020

महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- सिरपुर




 रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"

जिला :- महासमुंद

विधा :- छंद मुक्त कविता

विषय :- प्राचीन धरोहरों पर केन्द्रित

शीर्षक :- सिरपुर


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जरा सी दूरी पर राजधानी के,

बसा बौद्ध, जैन, हिन्दू स्मारक।

है धार्मिक, ऐतिहासिक स्थल,

पुरातात्विक महत्व संधारक।

           शरभपुरीयों की राजधानी,

           पांडुवंश का केन्द्र बना।

           मंदिर, मठ व स्मारक से,

           शहर भक्ति का केन्द्र बना।

लाल ईंटों से बनाया,

शिल्पकला का एक नमूना।

विराजे उसमें प्रभु श्री हरि,

करते सुन्दरता को दूना।

          बुद्ध आगमन का घोतक है,

          यहां मनोरम स्वास्तिक विहार।

          बुद्ध पूर्णिमा में सजता मेला,

           घर - घर का होता श्रृंगार।

एक विरासत इतिहास की,

नद के तट पर महादेव मंदिर।

गंधेश्वर जहां पूजे जाते,

लिए भक्ति भाव की सुंदर तस्वीर।

           जन्म भूमि माने लव - कुश की,

           जहां बसी थी जानकी मैया।

           जहां लव - कुश को ज्ञान मिला,

           थी जहां महर्षि वाल्मीकि की कुटिया।

इसी तरह ऐतिहासिक पन्नों पर,

स्वर्णिम चमकती पावन धरा।

महानदी के तट पर बसा,

सिरपुर सिरमौर यह हरा - भरा।


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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने महासमुंद जिले के ऐतिहासिक धरोहर सिरपुर के ऐतिहासिक महत्व का चित्रण करने का प्रयास किया है।

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