विषय _एकावली अलंकार
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक -हर शब्द का व्यापक मान
माँ का प्रेम प्रेम से संसार संसार से जीवन जगत |
प्रेम से रिश्ते बँधे प्रेम से होते प्रेममय दिन रात |
ख़ामोशी भी कुछ कहती है बिन बोले सब जताती है |
खामोशी मे शब्द भी होते है बाते भी होती है |
रूठना अपनों से मान जाना अपनों से |
प्यार जताना अपनों पर जीवन भी चलता अपनों से |
सब कुछ विधाता के हाथ सब उसकी माया |
वो होते है साथ दी भी उसी ने है काया |
फ़ूल सा ये जीवन खिलकर मुरझाना है |
क्षण भंगुर ये जीवन फिर भी जीवन जीना है |
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि"
बिलासपुर छ. ग.
मो
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