स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"तलाश"
***********************
हमें ऐसा एक जौहरी चाहिए
जो पत्थर को भी हीरा बना दे
हमें परखे , समझे बुझे
और पलकों में सजा दे
हमें जिसका एहसास नहीं
उसे उसका आभास हो
हमें जिसकी समझ नहीं
उसे उसका ज्ञान हो
हम तो नादान हैं
अभिशाप है जिंदगी हमारी
उसे वरदान हो
सवारने की नादानी हमारी
हमें ऐसा पारखी चाहिए
जो हमें परखे , सराहे
बिगड़े हैं तो बनाये
और कायनात में सजा दे
हमें ऐसा माली चाहिए
जो रास्ते की धूल को भी
मालाओं का फूल बना दे
No comments:
Post a Comment