संबलपुर, जिला-कांकेर,(छ. ग.)
विषय-शीतलता
शीतलता
तप्त ह्रदय की
शीतलता का एहसास,
जग में माँ तेरी
अहमियत है खास।
तुम ना हो तो हर
हो जाता है उदास,
शीतल लहर लगे जीवन
दायिनी जब हो पास।
तुम करुणा,तुम ममता,
तुम्हीं ज्ञान का खान,
तन-मन से बरसाती
शीतलता की खदान।
त्याग,साहस,स्नेह की
अविरल धारा से बनती महान,
तुम्हारी महिमा को
जानता सकल जहान।
शीतल मन्द शरद की
बयार लगती हो तुम,
चाँदनी रात में शीतल
बहार बन बहती हो तुम।
व्याख्या-प्रस्तुत कविता में माँ को शीतलता का एहसास बताया गया है।माँ की अहमियत को बताया गया है।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग.)
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