रचनाकार का नाम- महदीप जंघेल
राज्य- छत्तीसगढ़
कविता का शीर्षक- अन्नदाता किसान
विधा-छत्तीसगढ़ी कविता
(किसान भाइयो को समर्पित)
हमर किसान भाई, हमर किसान ,
काम करे जियत भर ले ,जाड़ा चाहे घाम।।
हमर किसान भाई..........
सुत उठ के बड़े बिहनियां!
नांगर धरके जाय,
मंझनी मंझना घाम पियास मा!
खेत ल कमाय।
हमू करब काम संगी ,हमर किसान ,
काम करे जियत भर ले ,जाड़ा चाहे घाम ।।
हमर किसान भाई ....
धान ,गहूँ,चना, राहेर,
खेत म ओहा बोवत हे।
रखवारी करे बर ,
मेड़ में घलो सोवत हे।।
माटी के बेटा हरे,हमर किसान ,
काम करे जियत भर ले,जाड़ा चाहे घाम ।।
हमर किसान भाई......
हरियर- हरियर खेत ल देख,
मन ओकर हरियाय।
कोठी भर-भर अन्न ल देख,
ओकर अंतस गदगदाय।।
रात-दिन मेहनत करे,लेवत राम नाम। काम करे जियत भर ले ,जाड़ा चाहे घाम।।
हमर किसान भाई.........
भूखे लांघन खेत में काम ,
सरग ,भुइँया ल बनाय।
संसार के जम्मो भूख मिटाके,
खुद चटनी बासी ल खाय।।
हमर किसान हरे,हमर भगवान,
रात दिन काम करे,देवे अन्न के दान।।
हमर किसान भाई ,हमर किसान......
Sunday, October 18, 2020
छत्तीसगढ़ से महदीप जंघेल की रचना- अन्नदाता
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