Sunday, October 18, 2020

छत्तीसगढ़ से महदीप जंघेल की रचना- अन्नदाता

रचनाकार का नाम- महदीप जंघेल
राज्य- छत्तीसगढ़
कविता का शीर्षक- अन्नदाता किसान
विधा-छत्तीसगढ़ी कविता
(किसान भाइयो को समर्पित)

हमर किसान भाई, हमर किसान ,
काम करे जियत भर ले ,जाड़ा चाहे घाम।।
               हमर किसान भाई..........      

सुत उठ  के बड़े बिहनियां!
नांगर धरके जाय,
मंझनी मंझना घाम पियास मा!
खेत ल कमाय।
हमू करब काम संगी ,हमर किसान ,
काम करे जियत भर ले ,जाड़ा चाहे घाम ।।
                      हमर किसान भाई ....

धान ,गहूँ,चना, राहेर,
खेत म ओहा बोवत हे।
रखवारी करे बर ,
मेड़ में घलो सोवत हे।।
माटी के बेटा हरे,हमर किसान ,
काम करे जियत भर ले,जाड़ा चाहे घाम ।।
             हमर किसान भाई......

हरियर- हरियर खेत ल देख,
मन ओकर हरियाय।
कोठी भर-भर अन्न ल देख,
ओकर अंतस गदगदाय।।
रात-दिन मेहनत करे,लेवत राम नाम। काम करे जियत भर ले ,जाड़ा चाहे घाम।।
             हमर किसान भाई.........

भूखे लांघन खेत में  काम ,
सरग ,भुइँया ल बनाय।
संसार के जम्मो भूख मिटाके,
खुद चटनी बासी ल खाय।।
हमर किसान हरे,हमर भगवान,
रात दिन काम करे,देवे अन्न के दान।।
  हमर किसान भाई ,हमर किसान......


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