स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- रिपोर्ताज़/आलेख
शीर्षक -"छत्तीसगढ़ी का गद्य : एक परिचय"
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छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य में भारतीय संस्कृति के तत्व देखने को मिलते हैं । छत्तीसगढ़ी भाषा में जो साहित्य रचा गया वह करीब 1000 साल से हुआ है।अनेक साहित्य कारों ने इस 1000 वर्ष को इस प्रकार विभाजित किया है।
1.गाथा युग -सन 1000 से 1500 ई.तक
2.भक्ति युग-(मध्यकाल) सन 1500 से 1900 ई. तक
3.आधुनिक युग-सन 1900 से वर्तमान तक
गाथा युग एवं भक्ति युग में गाथाओं का गेय रूप प्रचलित होने से इस युग में काव्य रचनाओं की अधिकता रही थी ।आधुनिक युग जो कि 1900 ई. से शुरूवात होती है छत्तीसगढ़ी गद्य के विकास में इस युग ने अपना महती योगदान दिया है।
छत्तीसगढ़ में गद्य लेखन की शुरुआत पंडित लोचन प्रसाद पांडे जी के द्वारा हुई ।छत्तीसगढ़ी में लिखें "हीरू के कहिनी" जो कि बंशीधर पांडे द्वारा रचित है तथा शिव शंकर रचित "मोंगरा" से गद्य का आगाज हुआ और ये रचनाएँ काफी प्रसिद्ध हुए। गद्य की विभिन विधाओं में अनेक रचनाएँ
रचनाकारों ने की आइये क्रमशः देखें:-
1. उपन्यास कृतियों में हीरू के कहिनी, (पं. वंशीधर शर्मा), दियना के अंजोर (शिवशंकर शुक्ला), चंदा अमरित बगराईस (लखनलाल गुप्त), कुल के मरजाद (केयूर भूषण), छेरछेरा (कृष्णकुमार शर्मा), प्रस्थान (परदेशीराम वर्मा) आदि।
2. कहानीकारों में -खूबचंद बघेल, टिकेन्द्र टिकरिहा, रामगोपाल कश्यप, नरेन्द्रदेव वर्मा, विश्वेन्द्र ठाकुर सुकलाल पांडेय, कपिलनाथ कश्यप, ।
3.नाटककारों में नन्दकिशोर तिवारी के नाटक, शायमलाल चतुर्वेदी, नारायणलाल परमार, डॉ॰ पालेश्वर शर्मा,श्री राम कुमार शर्मा ,परदेशीराम वर्मा, डॉ. सुरेश तिवारी जी के नाम प्रमुख हैं।
4.उर्मिला शुक्ल छत्तीसगढ़ की महिला कहानीकारों में बहु चर्चित नाम है।
5.गद्य व्यंगकारों में जयप्रकाश मानस द्वारा लिखित "कलादास के कलाकारी "को प्रसिद्ध विद्वान स्व. हरि ठाकुर ने छत्तीसगढी भाषा का प्रथम व्यंग्य संग्रह माना है। डॉ॰ बिहारी लाल साहू की कहानियों, जी.एस. रामपल्लीवार, परमानंद वर्मा, जयप्रकाश मानस, सुशील यदु एवं राजेन्द्र सोनी के गद्य व्यंग्यों को भी इसी श्रृंखला में रखा जा सकता है।
6.स्व. रवीन्द्र कंचन की छत्तीसगढ़ी रचनाएं देश की विभिन्न पत्रिकाओं में साग्रह छापी जाती रही हैं। यह छत्तीसगढ़ी की संप्रेषणीयता एवं प्रभाव का ही प्रतीक है।
7.छत्तीसगढ़ी का प्रथम हाइकु संग्रह ("मइनसे के पीरा"-2000) तथा डॉ॰ राजेन्द्र सोनी के बहुआयामी लेखन का जिक्र करना उचित होगा, जिन्हें छत्तीसगढ़ी में प्रथम लघुकथा संग्रह (खोरबहरा तोला गांधी बनाबो), प्रथम क्षणिका संग्रह (दूब्बर ला दू असाढ़), हाइकू संग्रह (चोर ले जादा मोटरा उतिअइल 2001) रचने का गौरव प्राप्त है
इसके उपरांत गद्य लेखन में विविधता देखने को मिलने लगी और लेखकों ने सभी विधाओं में प्रचुर मात्रा में सृजनात्मक लेखन किया ।इस अनुक्रम में रामनाथ साहू के उपन्यास -कका के घर,भुइँया, माटी के बरतन और जानकी प्रकाशित हुए ।प्रथम तीन उपन्यास जो कि छत्तीसगढ़ी के मुखपत्र' छत्तीसगढ़ी लोकक्षर' में लगातार छपते रहे । छत्तीसगढ़ी साहित्य रचनाकार हेतु विनोद कुमार शुक्ल जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा भी गया।
इस प्रकार छत्तीसगढ़ी गद्य का विकास निरंतर होता आ रहा है और होता रहेगा , इसमें कोई दो राय नहीं है बशर्ते कि आज की युवा पीढ़ी को इस ओर अपना रुझान करने की आवश्कता है।
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सन्दर्भ:-
*छत्तीसगढ़ ज्ञान वेबसाइट ।
*छतीसगढ़ विकास परख की वेबसाइट।
*डॉ. विनय कुमार पाठक की रचना "छत्तीसगढ़ी साहित्य अउ साहित्यकार"।
*छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य विकलिपीडिया ।
आदि से उद्घृत
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