Thursday, October 22, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान कृत संस्मरण- विलुप्त होते खेल

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-विलुप्त होते खेल
विधा-संस्मरण

 संस्कार धानी छत्तीसगढ़ विविध सांस्कृतिक विरासत को अपने में समााहित किए हुए है ।परंपरागत खेल इनमें से एक है ।बचपन में गांव में हम जिन खेलों को खेल कर तरोताजा महसूस करते थे,आज वे खेल विलुप्त प्राय होने की स्थिति में हैं,जिन्हे पुनर्जीवित करना अर्थात् अपनी संस्कृति को बचाना है ।
छग में खेले जाने वाले खेलों में लडकों द्वारा गिल्ली-डंडा,भौरा,बांटी,भौरा,गेडी
वहीं लड़कियों द्वारा फूगडी,घरबुंदिया, बिल्लस,रस्सीकूद,लगर्ची,फोदा,अअटकन -मटकन,गोल-गोल रानी,घोडा ल घाम खाय व सामूहिक खेलों में डंडा -पचरंगा,बिस-अमृत(परी-पत्थर),रेसटीप(छुपाछुपी),पिट्टुल,तिर्रा-पासा,नदी-पहाड़ प्रमुख हैं ।
बचपन में मेरे दोनों हाथ खेलते हुए बारी-बारी से टूट गये थे ।घर में खेलना सख्त मनाही था।तब मैं सातवीं की विद्यार्थी थी। गर्ल्स स्कूल में पढ़ती थी।रिसेस में रोज डंडा -पचरंगा खेलते थे। इस खेल में टांगों के बीच से डंडा को पीछे फेंका जाता है ।जिसका डंडा कम दूरी पर जाता है,वह अपना डंडा आड़ा लेकर खड़ा हो जाता है,उस डंडे को उछाला जाता है ।शेष खिलाड़ी सूखे गोबर या पत्थर में डंडा रखते हैं ।जो खिलाड़ी दाम देता है, वह  गोबर या पत्थर में पैर नहीं रखता उसे छूने दौड़ता है ।
रोज यह खेल खेलने में मुझे बहुत मजा आता था।एक दिन सफेद शर्ट धूल में गंदा हो गया था ।कक्षा में राय मैडम ने पूछा- स्काउट -गाइड में राज्यपाल पुरस्कार हेतु चार विद्यार्थियों का नाम भेजना है ।कौन -कौन जाना चाहोगे? मैं सबसे पहले खड़ी हुई। *तुम !*
अपना शर्ट देखी हो ।मुझे मैम बैठा दी।शेष चारों सहेलियों को राज्यपाल पुरस्कार मिला ।
तीस साल बाद वही मैडम उस स्कूल में लेक्चरर का प्रमोशन लेकर आई।उन्हें उस घटना की याद दिलाई।शिक्षक दिवस के दिन  प्राचार्य मैम ने बताया कि  अभी फोन आया आपका चयन राज्यपाल पुरस्कार के लिए हुआ है ।
मेरी मेम के आंखे नम थी।मेरे लिए *डंडा -पचरंगा ** खेल अविस्मरणीय ह गया था ।
विलुप्त हो रहे खेल हमारी संस्कृति की पहचान हैं ।इन्हेें विलुप्त होने से बचायें व अपनी गौरवशाली संस्कृति को बचाये रखने में अपना अमूल्य योगदान दें ।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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