Monday, October 5, 2020

संतोष प्रधान "कचंदा" की रचना- खतरा

नाम-    संतोष प्रधान "कचंदा"
स्थान-  कचंदा
जिला-  जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-  मुक्तक कविता
शीर्षक-  खतरा 

                    खतरा

कदम-कदम पर खतरा, जाएं तो जाएं कहाँ ?
मानव-मानव लड़ रहे हैं,    आपस में यहाँ ।

चोरी डकैती अत्याचारी, लोगों का शोषण है ,
आतंक अत्याचार का    हो    रहा पोषण है ,
कितना सहनशील बनें,  अब नहीं जाता सहा।
कदम-कदम पर खतरा, जाएं तो जाएं कहाँ ?

जिसकी लाठी उसकी भैंस, हो रहा चरितार्थ।
परोपकारी को छोड़, सिद्ध करते हैं स्वार्थ।
हैवानियत जागृत है, इंसानियत सोया कहाँ?
कदम-कदम पर खतरा, जाएं तो जाएं कहाँ?

मानव की दुर्भावना का, जब हो जाये अंत।
सदाचारी बन जाएं, जैसे  होते साधू-संत।
खुशहाल होंगे सब , बंधुत्व होगा तब यहाँ ।
कदम-कदम पर खतरा, जाएं तो जाएं कहाँ ?

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