रचनाकार- सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय मां
शीर्षक मां की ममता
विधा छंद मुक्त
मां की ममता
मां की महिमा अपार है,
जग की तारणहार है।
मां है विश्व स्वरूपा,
मां ममता की खान है।
मां की ममता एक समान,
ममता की अलग नहीं पहचान है।
सब मां होती देवी समान,
सब देवी ममता की छांव है।
सभी माओं को आदर दो,
यही देवी अवतार है।
मां की महिमा अपार है,
जग की तारणहार है।
मां को तुम सम्मान दोगे,
ये देवी पूजा समान है।
सबकी मां होती एक समान,
सब मां देवी समान है।
उनका तुम आदर कर लो,
देवी मां प्रसन्न समान है।
मां अगर खुश प्रसन्न रहेगी,
वह घर स्वर्ग समान है।
मां की महिमा अपार है, जग की तारणहार है......
सूर्य प्रकाश पाटिल
Friday, October 16, 2020
सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- मां की ममता
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...
उत्कृष्ट लेख
ReplyDelete