रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर,(छ .ग.)
विषय-प्राचीन धरोहरों ओर केंद्रित
शीर्षक-विरासत में मिली थाती
विरासत में मिली थाती
विरासत में मिली
हमको ये अनमोल थाती,
पुराने धरोहरों में है
हमारी संस्कृति मदमाती।
चलो यात्रा कर
आये चारों धाम की,
जहाँ अलौकिक देवालय
बने तीर्थ अभिराम।
पूरब में जगन्नाथ विराजे,
पश्चिम द्वारिका धाम,
उत्तर में बद्री,केदार,
सरिताएं बहती तमाम,
पश्चिम में रामेश्वरम,
सागर पखारती ललाम।
लाल किला,कुतुबमीनार,
ताजमहल,बुलन्द दरवाजा, कुरुक्षेत्र, जग हर्षित
होता देख मांडू महल।
कहीं देवी का बसेरा,
कहीं शिवालय लिए रूप साकार,कहीं अजंता एलोरा,
कहीं बिखरा सौन्दर्य अपार।
साक्षी बने है समय,
अवधि के संग है समेटा,
बुलन्दी के शिखरों पर
नाचता और धरा को है लपेटा।
निःशब्द ,मौन होते हुए
भी धरोहर है मुखर,
युग-युगांतर तक संभाल
रहे है गर्वोन्नत शिखर।
है अमूल्य धरोहर,लोग
परखते वो रहे निरखते,
ये सभ्यता, संस्कृति,
हमें सौंपना है नौनिहालों
को जो रहेंगे संवारते।
व्याख्या-प्रस्तुत कविता में देश की अमूल्य धरोहरों जिसमें,चारों धाम,वास्तु शिल्प पर आधारित कुतुबमीनार, ताजमहल, आदि का वर्णन है।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग.)
Wednesday, October 14, 2020
कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- धरोहर
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