जिला/राज्य -गरियाबंद (छः ग)
विधा - गीत
शीर्षक -
*मुहब्बत कर के देखा है*
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दर्द में जीकर अश्क़ को पीकर
मैंने तड़प कर देखा है............
टूटे दिल और बिखरें सपने देखा है
काली अंधेरी रात में रोकर देखा है
हाँ मैन मुहब्बत कर के देखा है
दर्दों गम के आँसू पीकर देखा है
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1दिल को मंदिर और उसे था रब जाना
सारी दुनिया झूठी और उसे था सच माना
पर मेरे रब ने मुझको बर्बाद किया
मेरे अरमानो का गला ही घोंट दिया
आँसुओं का मैन समंदर देखा है
हाँ मैंने मुहब्बत करके देखा है
दर्दों गम के आँसू पीकर देखा है
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2. सपने देखा था जिसके आँखों में
मैं जीता था जिसके हर एक साँसों में
कोई दुश्मन भी ना करे वो काम किया
मुझको जीते जी ही उसने मार दिया
ख़ामोशी का मुझपे खंज़र फैका है
हाँ मैन मुहब्बत करके देखा है
दर्दो ग़म के आँसू पीकर देखा है
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3 आईना था समझा तुम पत्थर निकले
इतना रोया हूँ फिर भी तुम ना पिघले
कैसा तेरा प्यार बताओं बेवफ़ा
मर गया या जिंदा हूँ मुड़कर ना देखा
कोहिनूर को पत्थर बनते देखा है
हाँ मैने मुहब्बत करके देखा है
दर्दों ग़म के आंसू पीकर देखा है
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