जिला -कांकेर,छग
शीर्षक-ओस की बूंद
विधा-कविता (मुक्त छंद)
घास पर चमकती शबनमी बूंद,
चमचमाता यूं कोहिनूर हीरा हो|
विरहिणी की सबसे बड़ी दौलत,
नथ -मोती है या आँख का अश्रु|
वसुन्धरा ने बिखेरी कीमती मोती,
कहीं से बढ़ाने आई नेत्र - ज्योति|
पौ फटते बटोर लेता है रवि मोती
अोस की बूंद क्षण में लुप्त होती|
ऐसा ही क्षणिक है सुख का मोती,
पाने को आंखें बरसों सपने ढोती|
ओस की बूंद है ये मानव जीवन,
खोना न इसे चमकना बन सूरज
अल्प समय में लिख एक कहानी,
जो अमर हो जाये सबकी जुबानी
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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