Monday, October 19, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- ओस की बूँद

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला -कांकेर,छग
शीर्षक-ओस की बूंद
विधा-कविता (मुक्त छंद)

घास पर चमकती शबनमी बूंद,
चमचमाता यूं कोहिनूर हीरा हो|

 विरहिणी की सबसे बड़ी दौलत,
नथ -मोती है या आँख का अश्रु|

वसुन्धरा ने बिखेरी कीमती मोती,
कहीं  से बढ़ाने आई नेत्र - ज्योति|

पौ फटते   बटोर लेता है रवि मोती
अोस की बूंद क्षण में लुप्त होती|

ऐसा ही क्षणिक है सुख का मोती,
पाने को आंखें बरसों सपने ढोती|

 ओस की बूंद  है ये मानव जीवन,
खोना न इसे  चमकना बन सूरज 

अल्प समय में लिख एक कहानी,
 जो अमर हो जाये सबकी जुबानी

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग

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