Friday, October 9, 2020

संतोष प्रधान "कचंदा" की रचना- कर्मों का फल

नाम-    संतोष प्रधान "कचंदा"
स्थान-  कचंदा
जिला-  जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा- कविता ( दार्शनिक चिंतन )
शीर्षक- कर्मों का फल 
      
                कर्मों का फल

कभी न कभी मिलेगा,  कर्मों  का  फल ।
सुफल चाहता है, तो सद्कर्म करता चल ।

नेकी कर दरिया में डाल, रख सुविचार ।
नीति के महत्व को मन से कर स्वीकार  ।
नीति-नीष्ठा ने प्रति आस्था  हो प्रबल ।
कभी न कभी मिलेगा कर्मोंं  का फल ।

चरित्र पर पड़ता है चिंतन का प्रभाव।
दुश्चिंतन से होता है मन का भटकाव।
चिंतन - मनन कर , हरदम व हरपल ।
कभी न कभी मिलेगा, कर्मों का फल ।

सद्बुद्धि , सद्भावना से करो सदा कर्म ।
सद्मार्ग में चलना बनाओ, अपना धर्म ।
प्राप्त होगा अगर आत्मशक्ति का बल ।
कभी न कभी मिलेगा , कर्मों का फल ।

मन की इच्छाशक्ति मत मारो कभी ।
मन में जोश भरो,  आज और अभी ।
मिलेगी सफलता , आज नहीं तो कल ।
कभी न कभी मिलेगा कर्मों का फल ।

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