रचनाकार - उर्मिला सिदार
ग्राम - बुलाकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा - कविता
शीर्षक - मां तुम हो
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*मां तुम हो*
मां तुम दूर नहीं,
तुम हमारे पास हो।
हर पल किसी ना किसी,
बहू बेटियां के साथ हो।
बेटियां की मुस्कान थी मां,
पोते-पोतियों की हंसी ठिठोली।
बहू की सम्मान थी मां,
यादों में तू हर पल बसी।
मां तुम दूर नहीं...........
अदृश्य हुआ है मां,
स्थूल स्वरूप रूप तुम्हारा।
स्थूल रूप से,अदृश्य है मां,
पर सूक्ष्म स्वरूप में,तुम पास हो।
तेरी ममता की छाया तले,
मेरी जन्नत अविरल तेरा साथ हो।
गई नहीं है यहां से तू मां,
ब्रह्मांड में समाई है।
परिवर्तन हुआ है बस रूप तुम्हारा,
जीवन तो पुनः वही पाई है।
मां तुम दूर नहीं..............
समझना, समझाना सिखाया था हमको,
सुख बांट दी थी जीवन में।
याद करें समझदारी तुम्हारी,
मन प्रफुल्लित हो जाता है।
जहां भी रहे तू खुश रहे मां,
तेरी ममता की परंपरा बनाएंगे।
तेरी संस्कार की प्रेरणा लेकर माँ,
सुकून की जिंदगी बिताएंगे।
तेरी कृतज्ञता ना भूले हम,
तेरी हर पल हमें याद आएंगे।
मां तुम दूर नहीं...............
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उर्मिला सिदार
रायगढ़ छत्तीसगढ़
Friday, October 16, 2020
रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- माँ
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