पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विधा :- कविता (मुक्त छंद )
शीर्षक :- तब तुम मेरे पास आना प्रिये
जब घोर अँधेरा छा जाए |
जब सत्य पराजित हो जाए |
जब कलियुग अपना हद भूले |
जब सदाचार सूली पर झूले |
जब पाप प्रचंड तांडव करे
जब दानव रूप मानव धरे |
तब अपने मन मंदिर में आवाज लगाना प्रिये |
तब तुम मेरे पास आना प्रिये |
जब आश कोई न बाकि हो |
जब जीवन पूर्ण अनुरागी हो |
जब झूट की आवाज बुलंद हो |
जब पापी पाप में मलंग हो |
गोपियों , राधा सा अपनत्व लिए |
माँ यशोदा देवकी सा ममत्व लिए |
माखन मिश्री खिलाना प्रिये |
तब तुम मेरे पास आना प्रिये |
जब सीता सी सती का
अपहरण हो |
न रहे मनुजत्व पाप भरा
अंतःकरण हो |
जब भरी सभा में कोई
अधम द्रौपदी आँचल खींचे |
निरापराध नारी चले जब आँखे मीचे |
जब महाभारत सा संग्राम हो |
जब पुण्य का नाम बदनाम हो |
तब अर्जुन सा बन पार्थ मुझे सारथि बनाना प्रिये |
तब तुम मेरे पास आना प्रिये।
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