Monday, October 12, 2020

सम्बलपुर से मनोरमा पटनायक की रचना- तब तुम

रचनाकार :- मनोरमा पटनायक 
पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
 वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा 
विधा  :- कविता (मुक्त छंद )
शीर्षक :- तब तुम मेरे पास आना प्रिये 



जब घोर अँधेरा छा जाए |
जब सत्य पराजित हो जाए |
जब कलियुग अपना हद भूले |
जब सदाचार सूली पर झूले |
जब पाप प्रचंड तांडव करे 
जब दानव रूप मानव धरे |
तब अपने मन मंदिर में आवाज लगाना प्रिये |
तब तुम मेरे पास आना प्रिये |

जब आश कोई न बाकि हो |
जब  जीवन  पूर्ण  अनुरागी  हो |
जब झूट की आवाज बुलंद हो |
जब पापी पाप में मलंग हो |
गोपियों , राधा सा अपनत्व लिए |
माँ यशोदा देवकी सा ममत्व लिए |
माखन मिश्री खिलाना प्रिये |
तब तुम मेरे पास आना प्रिये |

जब सीता सी सती का 
अपहरण हो |
न रहे मनुजत्व पाप भरा 
अंतःकरण हो |
जब भरी सभा में कोई 
अधम द्रौपदी आँचल खींचे |
निरापराध नारी चले जब आँखे मीचे |
जब महाभारत सा संग्राम हो |
जब पुण्य का नाम बदनाम हो |
तब अर्जुन सा बन पार्थ मुझे  सारथि बनाना प्रिये |
तब तुम मेरे पास आना प्रिये। 

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