रचयिता- पुष्पा पटनायक
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"नदी हूँ मैं"
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जीवन की रक्षा हेतु
अम्बर से उतरी हूँ।
जलधारा लिए बहती
जीवन का सुख देती हूँ ।
सींचती हूं धरा को
अन्न का भंडार भरती हूँ ।
मेरे तट पर बैठे विहंग
विचरण किया करते हैं ।
उमंग से नाव भी
इत उत डोला करते हैं ।
उद्विग्न हो जाऊं तो
प्रलय मचा देती हूँ।
शांति से जब चलूँ
निर्झर बन जाया करती हूँ।
बिन रुके बिन थके
अनवरत चलती रहती हूँ ।
सदियों से बहकर
सभ्यता की कहानी गढ़ती हूँ।
पत्थरों पर चल, कल-कल से
प्रकृति को संगीत देती हूँ।
नदी हूं मैं,श्रद्धा लिए
सागर में मिल जाती हूँ।
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