Saturday, September 19, 2020

चेतन सिंह क्षत्रिय की रचना- सड़क

रचनाकार -- चेतन सिंह क्षत्रिय
पता -------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय------ सड़क
शीर्षक---- सड़क हूं मैं .........
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पहाड़ों में करती हूं अठखेलियां !
नदी ,   नहरें   हैं  मेरी सहेलियां ! 
आकर शहरों की चकाचौंध में ,
देखती  हूं अनगिनत रंगरेलियां !
         दूर   तक   संग - संग  चलती  हूं !
         पटरियों से मिलने को मचलती हूं !
         सहती   हूं    बाढ़  के  लपेटे  भी ,
         सूरज   की तपन में  पिघलती  हूं !
चली जाती  हूं मैं  समंदर के पार भी !
चढ़ जाती हूं  ऊंचे  पर्वत , पहाड़ भी !
मंजिल    तक ले  जाना धर्म  है मेरा ,
मेरे अज़ीज़ अमीर-गरीब , लाचार भी !
          रक्तरंजित     होती   राह   हूं    मैं !
          असामयिक मौतों का गवाह हूं मैं !
          मेरा    भी  ह्रदय  है   ममतामयी ,
          यायावरी जीवन  का  पनाह हूं मैं ! 
दुख    नहीं   जब , मेरी  परतें हटती है !
सह लेती हूं दर्द ,  मेरा सौंदर्य घटती है !
पर रोक नहीं पाती हूं अपने आंसू मैं ,
मेरे नाम पर जब हरे-भरे पेड़ कटती है !
         नाज़ुक  है   मन  मेरा ,
            दिखने में कड़क हूं मैं .....
        न थमती हूं , न रूकती हूं ,
         स्थिर    हूं    मगर , 
       निरंतर    चलती     हूं !
          क्योंकि सड़क हूं मैं .........

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