Monday, September 21, 2020

सावित्री यादव "सावि"जी की रचना-नदी हूँ

रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
                बिलासपुर छ. ग. 
              
                
       शीर्षक _नदी हूँ |
                
मै नदी पहाड़ो से गुजर कर झाड़ियों के, 
रास्ते से निकल अपने सागर से मिलती हूँ |
कुछ गुनगुनाती हूँ कुछ बल खाती हूँ |
कंही  रास्ता बदल लेती हूँ |
तो कंही  सीधे  चल पड़ती हूँ |

मैंने रास्ते मे प्यासो  को पानी पिलाया |
कभी लोगो को जी भर  नहलाया |
कभी किसी ने मछली पकड़ कर भोजन पाया |
तो किसी ने मेरे किनारे बैठ कर सकून पाया |

कभी छोटा बच्चा मुझ पर चल कर |
खुश हुआ तो कभी मेरे पानी को, 
उछाल कर शरारत किया |
कभी गंदे कपड़ो को मैंने साफ किया |
तो कभी सूर्य  देव की पूजा मे साथ दिया |

मै आगे बढ़ी  किसी से रस्ता ना पूछा |
खुद सागर तक पहुंची किसी से सहारा ना लिया |
नदी हूँ सागर के  बिना अधूरी |
हो जाती हूँ पूरी ज़ब मानव हित कर्तव्य कर मिलती हूँ
सागर से, प्रकृति  के पाँच तत्वों  मे मै भी हूँ शामिल |
जीवन आधार हूँ |
प्यासे की पुकार हूँ  |
नदी हूँ |
नदी हूँ |

रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
               बिलासपुर छ. ग. 
            

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