रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _नदी हूँ |
मै नदी पहाड़ो से गुजर कर झाड़ियों के,
रास्ते से निकल अपने सागर से मिलती हूँ |
कुछ गुनगुनाती हूँ कुछ बल खाती हूँ |
कंही रास्ता बदल लेती हूँ |
तो कंही सीधे चल पड़ती हूँ |
मैंने रास्ते मे प्यासो को पानी पिलाया |
कभी लोगो को जी भर नहलाया |
कभी किसी ने मछली पकड़ कर भोजन पाया |
तो किसी ने मेरे किनारे बैठ कर सकून पाया |
कभी छोटा बच्चा मुझ पर चल कर |
खुश हुआ तो कभी मेरे पानी को,
उछाल कर शरारत किया |
कभी गंदे कपड़ो को मैंने साफ किया |
तो कभी सूर्य देव की पूजा मे साथ दिया |
मै आगे बढ़ी किसी से रस्ता ना पूछा |
खुद सागर तक पहुंची किसी से सहारा ना लिया |
नदी हूँ सागर के बिना अधूरी |
हो जाती हूँ पूरी ज़ब मानव हित कर्तव्य कर मिलती हूँ
सागर से, प्रकृति के पाँच तत्वों मे मै भी हूँ शामिल |
जीवन आधार हूँ |
प्यासे की पुकार हूँ |
नदी हूँ |
नदी हूँ |
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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