Wednesday, September 30, 2020

अनुरमा शुक्ला की रचना- उम्मीद

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान- ,दुर्ग (छ.ग.)
विधा - मुक्त
शीर्षक -
         *उम्मीद की किरण*


अलसाई सी सुबह आती है, उदासी लिये
ना कोई नई बात, ना किसी से मुलाकात..
आशा और निराशा में पल-पल बदलता मन,
लगता जैसे रुका हुआ हो सबका जीवन ।

अखबार से यूँ दिन की शुरुआत रहती-
आज की ताजा खबर होती-
मरीजों की संख्या में उछाल
और शेयर बाजार लुढ़का,
साँसे कितनों की उखड़ रही
और दम तोड़ती बाज़ारों की रौनक,
मँहगाई आसमान छू रही और
साँसे  कितनी हुई कीमती 
आमदनी के साथ-साथ शून्य
होता मस्तिष्क,जड़ हुआ शरीर,

यह सोचकर रोज सोते मगर
सुबह मिले कोई अच्छी खबर
मौत की खबरों से है दहशत,
फिर भी रहती कल की फिकर,

कोशिशें तभी होती हैं जब होती है आशायें, 
खत्म जरुर होंगी जीवन की बलायें,
कुछ तो मिलेगा इसका भी  हल,
क्योंकि-
एक किरण अब भी बची है उम्मीद की ।।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...