स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा-लघु कथा
शीर्षक -"बेसहारा"
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एक दंपत्ति 12 वर्ष से नि :संतान थे ।अतः वे अनाथ बच्चे को गोद लेना चाह रहे थे । पर दंपति के माता-पिता को एतराज था कि ना जाने वह किसका खून होगा अगर लेना ही है तो अपने किसी रिश्तेदार के बच्चे को गोद ले लो। लेकिन दंपत्ति ने उनकी बात नहीं मानी और वे अनाथालय से एक 5 वर्ष का बालक गोद ले आए। पर उनके माता-पिता ने उस बच्चे को कभी नहीं अपनाया। उस बच्चे को दादा-दादी का प्यार कभी ना मिल सका । 8 वर्ष बीते ही थे कि दंपत्ति का कार एक्सीडेंट में निधन हो गया। दंपत्ति के गुजर जाने के बाद उनके माता-पिता बेसहारा हो गए । जो कि काफी बुजुर्ग हो चुके थे । उनका अब इस बच्चे के अलावा कोई सहारा नहीं था ।वह बच्चा अब 13 वर्ष का हो चुका था। वह भी दोबारा अनाथ हो गया। अनाथालय वाले आए और उन्होंने दोनों बुजर्गों से पूछा कि ,क्या वह इस बच्चे को अनाथालय वापस भेजना चाहते हैं?तो वे बोले कि ये हमारा पोता है उसके माँ-बाप नहीं तो क्या हुआ हम इसे रखेंगे।ये हमारा एक मात्र सहारा है। फिर उन्होंने बच्चे से भी पूछा तो उसने कहा मेरे दादा-दादी का मैं ही एकमात्र सहारा हूं। दादा-दादी को मेरी जरूरत है।
इस घटना से मुझे एक बात समझ में आ गई आवश्यकता इंसान को बदल देती है यह एक अद्वितीय सत्य है।
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