जिला :- महासमुंद
शीर्षक :- किताबें
विधा :- छंद मुक्त कविता।
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अनगढ़ मित्रों के समान है,
जग में एक प्यारा किताब।
ज्ञान की गंगा भरी हुई है,
मोल है जिसका बेहिसाब।
ज्ञान है जिसमें अंतरिक्ष की,
संचित जिसमें ज्ञान - विज्ञान।
जीने का सलीका बतलाती,
भरा इसी में सामाजिक ज्ञान।
जीवन मूल्यों का पाठ पढ़ाती,
भरी हुई रोचक कहानी।
अनुपम भावों के काव्य है,
सारी दुनिया जिसकी दीवानी।
चित्राहार अलंकरण जिसका,
भरता मन में सद् आचरण।
भाषाओं का ज्ञान भरा है,
जग को सिखाता व्याकरण।
अद्भुत है गणितज्ञ जगत का,
जोड़ - तोड़ का ज्ञान भरा।
मानव ने सीखा किताब से,
कैसे बदलती काया धरा?
मन लगा गर मग्न हुए तो,
किताबें सखा सरीख है।
प्रतिपल पुनित विचार रखे है,
देता नवल नित सीख है।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार के ने किताबों को शब्दबद्ध करने का प्रयास किया है।
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