जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
विषय - भावी सुबह
विधा - छंद मुक्त कविता
( अन्योक्ति अलंकार )
शीर्षक - भावी सुबह सुनहरा होगा
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// भावी सुबह सुनहरा होगा //
भावी सुबह सुनहरा होगा !
घोर अँधेरी रात है काली ,
राह न सूझे कोई ।
हिंसक जीवों का डर भारी ,
मौत सामने होई ।।
तो भी मत घबराना प्यारे ,
भावी सुबह सुनहरा होगा .....!
लहरों और तूफानों से ,
नाविक हार नहीं जाना ।
संकट का यह भँवर भयानक ,
लेकिन तुम्हे लक्ष्य को पाना ।।
विश्वास करो धीरज रखो ,
भावी सुबह सुनहरा होगा.....!
बेकारी मँहगाई गरीबी ,
युवा वर्ग परेशान हैं ।
डिग्री लेकर भैंस चराते ,
मेरा देश महान है ।।
कुछ भी कहो पर आशा है ,
भावी सुबह सुनहरा होगा.....!
दया - धर्म की बात पुरानी ,
मानवता छटपटा रही ।
आतंक भ्रष्टाचार नशा ,
फैशन सबको डुबा रही ।।
फिर भी संतों की सेवा से ,
भावी सुबह सुनहरा होगा.....!
कोरोना का ग्रहण लगा है ,
दुःख अशांति छायी ।
विश्व युद्ध का खतरा हर पल ,
कैसे आग बुझाई ??
पूर्ण भरोसा है ईश्वर पर ,
भावी सुबह सुनहरा होगा.....!
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