संबलपुर,जिला-कांकेर,(छ. ग.)
विषय :- *वनांचल में शिक्षा का महत्व*
(उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग)
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*शिक्षा दीप जलाएं*
वनों,गह्वरों,गुफाओं में
शिक्षा दीप जलाएं,
ज्यौं घने तिमिर में
नव ज्योति की
नव शिखा फैलाएं।
जो है अटके,भटके
और अधकुचरे,
नव प्रयासों से मानों
नव सूर्य उगाएं।
शिक्षा है जीवन का आधार,
जिसे ना मिले उसका जीवन बेकार,
जो शोषित है,पीड़ित है,उनके
सपनों को करें हम साकार।
वनांचल में भी
इसका प्रसार करें,
मानों वहाँ नव कानन
का विस्तार करें।
रम्य प्रकृति वनांच्छादित
निर्झरिणी में ज्यों
प्रसून खिलते है,
आओ उस रम्य धरा के
भविष्य को पुष्पों सा गढ़ते है।
चन्द्रिका सी चमक उठेगी,
ज्यों सौदामिनी जागती
स्याह घटाओं से,
अभावों में पले लोगों के मन में
ज्ञान दीप जला काट देंगे
अज्ञानता को नवाचारों से।
वनों,गह्वरों,गुफाओं में
शिक्षा का दीप जलाएं,
ज्यों घने तिमिर में नव ज्योति
की नवशिखा फैलाएं।
*उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग*
1.ज्यों घने तिमिर में
2.मानों नवसूर्य उगाएं।
3.ज्यों सौदामिनी जागती
स्याह घटाओं से।
4.ज्यों प्रसून खिलते है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
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