विषय _अद्वितीय सच
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक -निस्वार्थ प्रेम
एक महिला थीं उसका विवाह होकर टूट गया था |उसके माता पिता ने उसकी शादी दूसरी जगह कर दी उसके दूर पति के पहले से दो बेटे थे |
यह शादी उसने अपने बेटो की परवरिश के लिये कीवह महिला बहुत ही सरल और दयालु थीं | वह बच्चों को अपने बच्चों के जैसे प्यार करती थीं |
कभी भेदभाव नहीं करती थीं| इसी तरह उसने दोनों लड़को को पढ़ाया पाला पोसा और उनका विवाह किया | इसी समय उसके पति की मृत्यु हो गईं |
अब वह बड़े बेटे के पास रहने लगी अब उसके रिश्तेदार उस महिला को भड़काने लगे की ये सौतेले है इनको छोड़ और पूरी जायजाद का कुछ भी इन लोगो को मत दे| पर उस महिला ने कहा की इन बच्चों के कारण ही मेरा उजड़ा घर बसा था मै इन लोगोसे अलग नहीं रहा सकती ना ही इन्हे छोड़ सकती हूँ |जो इनका है |इनका ही रहेगा घर जायजाद और मै भी उस महिला की इस बात से एक अद्वितीय सच का पता चलता है |की प्रेम निस्वार्थ भव से किया जाता है ना की मतलब से प्रेम मे बढ़ी शक्ति होती है |
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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