Monday, September 14, 2020

मीराआर्ची चौहान कृत आलेख- हिन्दी है हम

रचना कार का नाम -  *मीराआर्ची चौहान*
 जिला -  कांकेर, छ ग
 शीर्षक -  *हिंदी है हम*
विषय-   हिंदी दिवस
सरल सरस और सर्व समावेशी भावनाओं से सुवासित भारती जीवन मूल्यों संस्कृति एवं संस्कारों की संवाद सम प्रेषक और परिचायक प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के मध्य सेतु स्वरूपिणी राजभाषा हिंदी को आज के दिन 14 सितंबर उन्नीस सौ 49 को राजभाषा के रूप में आत्मसात किया गया था। मुझे गर्व है अपनी भाषा पर राष्ट्रीय एकता की सूत्रधार हिंदी के द्वारा सारे भारत को एकता के सूत्र में पिरोया जा सकता है स्वामी दयानंद सरस्वती जी के यह उद्गार आज सहसा ही याद आते हैं क्योंकि विगत 40 सालों में हिंदी भाषी 10 करोड़ ब ढे। 5 साल में दक्षिण भारत में हिंदी सीखने वाले 22% बढ़े। शब्दकोश में 20,000 से बढ़कर 1.5 लाख हो गए।
हिंदी दिवस पर हिंदी दिवस पर यह पंक्तियां सहसा ही याद आती है- 
 *मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।*
 *हिंदी हैं हम वतन है हिंदुस्तान हमारा।।*
     आइए हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने में अपना अमूल्य योगदान दें।
  * *जिससे है मेरे देश की              शान*
      *मेरी हिंदी  हैं महान।।*   
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 मीरा  आर्ची चौहान
 कांकेर, छत्तीसगढ़
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