Tuesday, September 29, 2020

पुष्पा पटनायक की रचना- ग्रहण

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता (अतिसंयोक्ति अलंकार का प्रयोग) 
शीर्षक -"ग्रहण"
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ग्रसित तन ग्रसित मन 
ग्रहण ग्रसित जैसे चंद्र 
ग्रहण का भय सताये
जो  ना    होता     हो 
वह   भी    हो   जाए 
रोग   व्याधि   लगाये
ग्रास  चन्द्र  जो  देखे 
वह तो  मर  ही जाये 
मानो   घना   अंधेरा 
काला  कुआं  गहरा 
आवाजें आती  तेज 
भूतों  का   हो  डेरा 
झींगुर के  बोल  सुन
चुड़ैल चीखे चिल्लाये 
पांव  जो  धरे  बाहर 
भूतों  संग  बतियाये 
जो  नजर  पड़ जाए 
तन  मन थर -थराये
मन  में  डर    इतना
जोर- जोर  चिल्लाये
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