यशवंत"यश"सूर्यवंशी
भिलाई दुर्ग छग
विषय- राखी/रक्षाबंधन
विधा मनहरण घनाक्षरी छंद
पहने हो हाथ घड़ी,सोना चाँदी कड़ा कड़ी।
राखी बिन हाथ सुना,घर बिन बहना।।
बहना से चारों ओर,घर द्वार भरे भरे।
महकी है बगिया में,कलियाँ क्या कहना।
कहना क्या बहना से,खुशियाँ भी तनहा से।
धन नहीं धन लगे,बहना ही गहना।।
गहना से बढ़ता है,शोभा यश मान सब।
कोई बहना जनम,बिना नहीं रहना।।
यशवंत"यश"सूर्यवंशी
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