Monday, August 31, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- जीवन के पड़ाव

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विधा कविता
शीर्षक  जीवन के पड़ाव 

     जीवन के पड़ाव
जीवन में कई पड़ाव है आते,
          अल्पविराम है यह पुर्णविराम ना समझो।
सुख दुख हार जीत,
        आते हैं चले जाते हैं।
लाभ हानि रोग निरोग,
          होते हैं टल जाते हैं।
जीवन जी यह पड़ाव है,
          पुर्णविराम नासमझ अल्पविराम है ये।
बचपन की दिन खेलते कूदते,
         कैसे बीता नहीं पता चला।
कब जवां हम हो गए,
            पता हमें यह चला नहीं।
जवानी में हम पैसे के पीछे भागे,
           कब बुढ़ापा आ गया पता हमें यह नहीं चला।
यह जीवन के पडाव है,
        पुर्णविराम नहीं अल्पविराम है ये।
बुढ़ापे में साथ खोजते,
    अपनों का हम हरदम।
बुढ़ापे में बचपन के दिन,
          याद कर रो पड़ते हम अक्सर।
यही जीवन के पड़ाव हैं,
        पुर्णविराम नहीं अल्पविराम है ये।
अगर जीवन के किसी पड़ाव में,
           देह त्याग दें हम तो।
फिर भी हम जिंदा रहते हैं,
           अपने लोगों के दिलों और यादों में।
इसलिए जीवन में कई पड़ाव हैं आते,
         परन्तु इसे पुर्णविराम ना समझो अल्पविराम है ये......
   
सूर्य प्रकाश पाटिल

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