रचनाकार - सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग
. विषय _रक्षाबंधन
विधा _ छंद मुक्त (अनुप्रास अलंकार )
शीर्षक _राँखी का बंधन
भाई का अभिमान है| बहन |
राँखी का सम्मान है| बहन |
दुनिया का सबसे पवित्र रिश्ता है | ऐ |
भाई बहन का प्यारा बंधन है | ऐ |
रोते को जो हँसा दे प्यार से जो मना ले |
होता ऐ प्यारा रिश्ता है | जो प्यार से गले लगा ले |
कहती है|बहना मुझे जो मान दो सम्मान दो |
करो ना किसी और की बहन का अपमान |
बस इतना ही तुम मेरा कहा मान लो |
रहे सब के घरो में खुशियाँ क़ोई ना दुखी हो |
हर माँ पिता की चिंता दूर हो |
ज़ब हर घर में कृष्ण जैसा भाई हो |
जिसने द्रोपदी की लाज बचाई |
जिसने धागे का मान रखा |
वैसा ही तुम बन जाना |
मेरा उपहार समझ ऐसा कर जाना |
प्यार से प्यार बंधन है जो रेशम की डोरी से बंधी है |
सजी है भाई की कलाई में बहना ने प्रीत निभाई है |
भाई तुम भी प्रीत निभा देना |
ज़ब याद मेरी आये अपनी कलाई पे हाथ फेर देना |
भाई-भाई ही बने रहे | बहन बहन सी प्यारी हो
ऐसा रक्षा सूत्र हर बहन ने भाई को बाँधी हो |
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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