Thursday, August 6, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- ग्रामोदय

रचनाकार-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-ग्रामोदय
विधा-कविता ( मुक्त छंद)
अलंकार-वीप्सा अलंकार

गांव -गांव  में अलख जगा है,
स्वर्णिम युग अब लाना है।

खेतों और खलिहानों में अब, एकता का फसल उगाना है।

द्वार -द्वार पर दीप जलाकर,
पसरे तम को  अब मिटाना है।

शाति, एकता और भाईचारे का
संदेशा चहुंओर बिखराना है।

आओ मिलकर कदम बढायें,
अब गांव को स्वर्ग बनाना है।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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वीप्सा अलंकार-गांव- गांव,द्वार -द्वार।
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