Monday, August 10, 2020

रायगढ़ से मोनालिसा बेहरा की रचना- युद्ध

रचियता-मोनालिसा बेहरा
रायगढ़,छत्तीसगढ़
विषय-युद्ध
विधा-छंद मुक्त कविता
अलंकार- ध्वन्यार्थ व्यंजना अलंकार
शीर्षक-

सुसज्जित सेना का बिगुल बज उठा
समर क्षेत्र वीर योद्धाओं से सजा
ललाट पे तिलक चमक रहा
जैसे वीर-वीर से मिल रहा

दोनों और वीरता की मिशाल हैं
एक -दूसरे से टकराने को तैयार हैं
हैं कर्म वीर ही सच्चे युद्व वीर हैं
आघात, पीड़ा क्या मृत्यु तक का भय नही

रण क्षेत्र में गूंज रही रण भेरी है
तलवार से तलवार टकरा रहा
धनुष से धनुष की टंकार है
आसमान में धूल जैसे छा गया
युद्ध ही जैसे आखरी उद्देश्य है।

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