Saturday, August 8, 2020

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ से कवयित्री मीनाक्षी अवस्थी'छाया' जी की कविता- किताब

मीनाक्षी अवस्थी 'छाया'
बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
 विषय......किताब।
 ............' किताब '.........
  दोहे......
अक्षर-अक्षर सीख कर हाँ,मात्राएँ भी सीख।
 लिख किताब फिर जिंदगी,साँसें मिलें न भीख।।
 मुख्य पृष्ठ पर आप हैं, और अँतिम पर चार।
 भीतर क ई कहानियाँ, क्या किताब है यार।।
 हम ही लिखते रोज हैं ,खुद ही अक्षर चार।
 इस किताब के हम स्वयँ,एक मुख्य किरदार।।
  आँसू हैं, मुसकान हैं, और ठहाके मार,
  लिखकर पढ़ता हो चकित, क्या किताब है यार।
 कहाँ-कहाँ से हुई शुरू, अँत बतावें और।
 क्या किताब है जिंदगी, अनगिनती हैं ठौर।।
 कभी प्यार बरसात है,कभी तरसता खेत।
  क्या किताब है जिंदगी,ज्यों मुट्ठी की रेत।।
  सुख दुख साझे हो चले,कागज कलम दवात।
   कागज का दिल है बना,इस किताब के हाथ।।
  मौसम बारह मास के, उनसे अलग बसंत।
  इस किताब ने कर दिया, क ई गृहस्थ को सँत।।
  तब तक यह रचती रहे,जब तक चलती साँस।
  वो किताब है जिंदगी ,कदम-कदम पर फाँस
  कभी लगे" छाया"भली ,कभी सुहावे धूप।
 बिना विमोचन जिंदगी, सबके हाथ अनूप।।
         मीनाक्षी अवस्थी "छाया"बिलासपुर, छत्तीसगढ़।

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